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शुक्रवार, 30 अप्रैल 2010

दुश्मनों आप सिर्फ़ हथियार दो , गद्दार तो मिल ही जाएंगे ...


किसी ने बहुत पहले कहा था कि भारत के दुश्मन बहुत ही किस्मत वाले हैं इन्हें सिर्फ़ हथियार ही देना होता है , गद्दार नहीं ढूंढने पडते , जिनके हाथों  में हथियार देकर देश को तोडने की साजिश रची जाती है । अभी हाल ही में फ़िर से एक बार माधुरी गुप्ता की गद्दारी के खुलासे ने यही बात सिद्ध कर दी । माधुरी जो भारतीय सुरक्षा से जुडी सर्वोच्च संस्था के साथ न सिर्फ़ जुडी हुई थीं बल्कि बहुत ही जिम्मेदार पद पर नियुक्त थीं । उन्होंने भारत की सुरक्षा व्यवस्था से जुडे बहुत से राज़ दुश्मन देश को बेच डाले । इसके बदले में उन्हें क्या कब कब मिलता रहा ये तो आने वाले समय में ही पता चल पाएगा । मगर एक बार फ़िर से इस घटना ने आम जनता के मन में बहुत से सवाल खडे कर दिए हैं ।


         आज भारत की जनता से करों के नाम पर उनकी मेहनत की कमाई का मोटा हिस्सा सरकार ले कर जिन अधिकारियों , कर्मचारियों की तनख्वाह पर खर्च करती है वो क्या सचमुच ही इसके हकदार हैं ? क्या जिनके हाथों में देश की सुरक्षा नीतियों के निर्माण के जिम्मेदारी सौंपी गई है वे इस लायक हैं कि पूरा देश उन पर भरोसा कर सके । रोज सीमा पर खडे हमारे जवान जो अपनी जान हथेली पर लिए दुश्मनों से जूझते हैं उनकी जान की कीमत ये गद्दार पहले ही नहीं लगाए बैठे हुए हैं , इस बात की गारंटी कौन देगा । आखिर किस कारण से इन्हें अफ़जल गुरू और अजमल कसाब जैसा और शायद उससे भी बडा दुशमन क्यों नहीं नहीं माना जाए । वे तो ऐसे दुशमन हैं जो खुले आम अपनी दुशमनी दिखा और निकाल रहे हैं , मगर ये जो इस देश की मिट्टी में पले बढे और इसी देश की सुरक्षा , उसका मान सम्मान और हजारों सुरक्षा कर्मियों का सौदा छुप छुप कर रहे हैं आखिर उनके साथ कैसा व्यवहार होना चाहिए । कानून कहता है कि गद्दारी की सज़ा मौत हो सकती है । सही मायने में तो मौत से भी कुछ बदतर हो तो वो होनी चाहिए ।

अब समय आ गया है कि , आम जनता सब कुछ सरकार और प्रशासन , कानून व्यवस्था के भरोसे ही डाल कर चुप न बैठे । अब आम जनता को आगे आकर अपनी ताकत का एहसास कराना चाहिए । हर सही का पुरजोर समर्थन और हर गलत का भारी विरोध करना चाहिए । इसके लिए कोई जरूरी नहीं है कि जनता नेताओं द्वारा आयोजित , प्रायोजित रैलियों में जाए, हडताल और बंद का हिस्सा बने । नहीं इसकी कोई जरूरत भी नहीं है , आज बहुत से ऐसे माध्यम है जहां से आम आदमी की आवाज उनका मत हर उस व्यक्ति और व्यवस्था तक पहुंचाया जा सकता है जो अंधा और बहरा बना बैठा हुआ है । इसके साथ ही ऐसे सभी व्यक्तियों का उन प्रतिनिधियों का , उन संस्थाओं का भी सामाजिक बहिष्कार किया जाना चाहिए । ऐसे सभी व्यक्तियों के घर परिवार , सगे संबंधियों से सारे रिश्ते नाते तोड लिए जाने चाहिए ,यहां तक की उनके यहां सेवा देने वाले सभी सामाजिक सहयोगियों , नाई, माली धोबी, आदि को भी उनका बहिष्कार कर देना चाहिए । यकीनन ये सब बहुत ही मुश्किल है और शायद बहुत हद तक अप्रायोगिक भी , मगर यदि सिर्फ़ ये सोच कर अब भी चुप बैठे तमाशा देखते रहे कि सब कुछ सरकार और कानून व्यवस्था का ही काम है तो फ़िर थोडे थोडे अंतराल पर ऐसी माधुरियों की मधुर कथाओं को पढने देखने सुनने के लिए तैयार रहना होगा।

7 टिप्‍पणियां:

  1. दुश्मनों आप सिर्फ़ हथियार दो , गद्दार तो मिल ही जाएंगे ...
    मिल जायेंगे क्यों अब तक तो मिलते ही रहे हैं

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  2. Bhare pade hai Thok ke bhaav Ajai Sahaab.

    Yahaan luchche lafangon kee bharmaar hai.
    mere desh mein bahut gaddar hai.

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  3. देश भक्ति शायद फिर गुलाम होकर सीखेंगे ..आज़ादी विरासत में मिली है इसलिए इसकी क़द्र नहीं ...वरना चाँद सिक्को के लिए अपने देश हो गिरवी ना रख देते

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  4. ऐसे बहुत से शॅक्स हैं जिन्हे अब भी पता नही अपना देश क्या होता है...भारतवासी कब जागेंगे पता नही..सार्थक आलेख..धन्यवाद अजय भैया

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  5. मिलते रहे हैं और मिलते रहेंगे.

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  6. sahi kaha...........
    ye desh hai anek gaddaron ka
    jaychando aur dalalon ka
    is desh ka yaron kya kahna
    ye desh hai duniya ka ?????

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  7. अजय भाई, सिनेमा हाल में फिल्म से पहले राष्ट्रगान का आदेश वापस लेना पड़ा क्योंकि लोग उसके सम्मान में खड़े नहीं होते थे या फिर खड़े होने और राष्ट्रगान को गाने वालों का मजाक उड़ाते थे. जब आम जनता देशप्रेम और राष्ट्रवाद को मजाक समझती हो तो ऐसे देश में गद्दारों की क्या कमी हो सकती है.

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मुद्दों पर मैंने अपनी सोच तो सामने रख दी आपने पढ भी ली ....मगर आप जब तक बतायेंगे नहीं ..मैं जानूंगा कैसे कि ...आप क्या सोचते हैं उस बारे में..

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