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शुक्रवार, 14 अक्तूबर 2016

बदलती सामरिक स्थिति ...





नरेंद्र मोदी की पूर्ण बहुतमत की सरकार का गठन करके ,भारतीय जनमानस ने यह स्पष्ट सन्देश दे दिया था कि ,भारतीय राजनैतिक परिदृश्य और राष्ट्रीय विचारधारा में निश्चित रूप से , पूर्व से इतर कुछ ,ठोस परिवर्तन होने जा  रहे  हैं | इनमें पहला था पड़ोसियों के साथ  बेहतर व् स्पष्ट  रिश्तों  की शुरुआत | पिछले दो वर्ष की बहुत सी तारीखें इस   बात की गवाह रही हैं ,कि भारत की नई सरकार ने शपथ ग्रहण के समय से ही पूरे विश्व के साथ नए व् बेहतर सम्बन्ध की शुरुआत करके वैश्विक ग्राम और वसुधैव कुटुम्बकम की परिकल्पना को साकार करने में मन व् प्रत्यक्षतः खुद को लगातार साबित करने का प्रयास किया |

हालांकि पिछले कुछ दशकों में मुस्लिम चरमपंथ , पेट्रो रिजर्व क्षेत्रों पर नियंत्रण व् आर्थिक मंदी  के कारण विश्व के बहुत से भागों में अलगाववादियों व् आतंकियों ने अपने अस्तित्व  को शेष दुनिया को समाप्त करने से जोड़ कर उन्मादी , हिंसक व् अंतहीन संघर्ष "जेहाद" के नाम पर छेड़ दिया | विकास व् सृजन की दौड़ में खुद को पीछे रखने वाली ये कबायली सभ्य्तायें  जब पश्चिमी देशों की घोर एशो आराम और उपभोगी संस्कृति के संपर्क मे आए तो स्वाभाविक रूप से संघर्ष शुरू हो आया |

भारत प्रारम्भ से ही सनातन संस्कृति का वाहक होने कारण सर्वग्राह्य व् सर्व धर्म समभाव की परिपाटी पर ही चलता रहा | आधुनिक राजीनति में धर्म , जाति , आदि के समावेश और उससे अधिक दुरुपयोग ने कालान्तर में विदेशी प्रशासकों को यह अवसर दे दिया कि उन्होंने भू क्षेत्र का विभाजन करके एक शास्वत समस्या और संघर्ष का बीजारोपण कर दिया | पाकिस्तान , बांग्लादेश और चीन जैसे अमित्र पड़ोसियों की उपस्थिति से उत्पन्न अवश्यम्भावी घटनाओं, व्  आक्रमणों  से आक्रान्त , भारत , नई सरकार बनने के बाद नई नीतियों व निर्णयों के अधीन अग्रसर हो चुका था |

पिछले दो वर्षों में उत्पन्न अनेकों अवसर पर एक प्रशासक व् निजी मित्र के रूप में भी पाकिस्तान , उनके हुक्मरान , पाकिस्तानी अवाम सहित पूरे विश्व को अपने प्रयत्न , मतवी व् संबोधन से स्पष्तः अवगत करा दिया था कि आतंकवाद के रास्ते को छोड़ विकास व् सहभागिता के रास्ते पर चलना होगा | किन्तु  आचरण व् चरित्र के अनुरूप वही गलतियां दोहराता पाकिस्तान आज जबरन दोनों देशो को युद्ध के मुहाने तक खींच लाया है | वर्तमान में नियंत्रण रेखा पर जो स्थिति है वह पिछले बीस वर्षों में अब तक की सबसे तनावपूर्ण स्थिति है | रही सैन्य तैयारियों की बात तो हालिय६आ वैश्विक हालातों तथा आतंकवादियों की बढ़ती गतिविधियों व् खतरे के मद्देनज़र लगभग हर देश की सेना सतर्क व् सचेत मोड पर ही है | भारत सेना सतर्क व् सचेत मोड पर ही है | भारत के लिए सुरक्षा एजेंसियों की तरफ से जारी हाई अलर्ट के कारण अव नियंत्रण रेखा पर सर्दियों में घुसपैठ की आशंका के कारण सेना पहले ही सतर्क व् लैस थीं हालांकि विशेषज्ञों की माने तो भार्ते४एय सैन्य बल को पूरी तरह से तैयार होने के लिए कुछ चुनौतियों से जूझना होगा |

पूर्व सेना उपप्रमुख ले.जे. फिलिप काम्प्स ने पठानकोट हमले के बाद सैन्य तैयारियों का पुनर्सर्वेक्षण कर रिपोर्ट पेश करते हुए अनुशंसा की , कि भारतीय सेना में उपयोग किए जाने वाले लगभग  , 1000 पुराने T-72 टैंकों को तुरंत ही अत्याधुनिकीकरण की जरूरत है | वर्तमान में विशेष कमांडो द्वारा  उपयोग में लाए जाने वाले इंसास (इन्डियन स्माल आर्म्स सिस्टम) राइफलों का नारंगी रंग रात्रि युद्ध के लिए सर्वथा अनुपयुक्त बताया गया है , जिसमें सुधार के लिए प्रयास किये जा रहे हैं |
वर्ष 2015 की एक रिपोर्ट के अनुसार सेना में 9100 अधिकारियों की कमी बताई गई जिन्हें जल्द से जल्द भरा जाना चाहिए | देश में निर्मित टैंक अर्जुन एम् के II में इस्राईली राकेटों के लिए फिटिंग की समस्या पर भी काम किया जा रहा है | सेना को अपने जवानों के लिए 3 ,50, 000 बुलेट प्रूफ जैकेटों की जरूरत है , जिसमें से 50,000 की खरीद प्रक्रिया को आगे बढाया जा चुका है |भारतीय सेना की भविष्य की चुनौतियों के मद्देनज़र सेना के लिए राफेल विमान , हवित्ज़र तोपें जैसे आधुन्बिक रसखा आयुधों का आयात व् रक्षा एवं अनुसंधान संस्थान द्वारा निर्माण और आधुनिकीकरण की दीर्घकालीन योजना पर काम किया जा रहा है |हाल ही में हुए एक उच्च स्तरीय बैठक में , 7 .62 मि .मि की अधिक घातक 65 ,000/- राइफलों की खरीद व 20 ,000/- राइफलों के देश में निर्माण को हरी झंडी दी है | इनके अलावा 46, 000/- करोड़ मूल्य की 145 अति हल्की होवित्ज़र M 777 , १६,९००/- करोड़ मूल्य  के 420 एयर  डिफेन्स गन , 15,750/- करोड़ रुपये मूल्य  के 814 आर्टिलरी गन एवं 6,600/- करोड़ मूल्य के अर्जुन M K -II टैंकों की खरीद व् निर्माण को भी अंतिम रूप दिया जा रहा  है  | 



किसी भी शांतिप्रिय व् विकासशील देश के लिए अब यह बहुत जरूरी हो जाता है कि विश्व में पैर पसारते आतंकवाद के डांस से खुद को बचाए रखने के लिए भी उसे अपनी सीमाओं , अपने भूक्षेत्रों व् नागरिकों की सुरक्षा व् संरक्षण के लिए पुख्ता इंतजाम करके रखना  होगा | इसके साठ ही देशवासियों को भी आगामी उत्सवी महीनों व् समय होने के कारण अधिक सजग व् सचेत रहकर सरकार व् प्रशासन के प्रयासों को सफल बनाना होगा | जो भी हो , आने वाले समय में सैनिक प्रतिद्वंदिता में वृद्धि की संभावना के मद्देनज़र पूरा विश्व एक उहापोह और तनावपूर्ण माहौल में परिवर्तित होगा , ये तय है |  

रविवार, 2 अक्तूबर 2016

मुद्दा ये नहीं कि , सलमान ने क्या कहा ....






अब इस देश में सबसे  ज्यादा  बड़ी  और  सबसे ज्यादा दिखने और बिकने वाली बात या खबर , सिर्फ ये हो गई है कि अमुक व्यक्ति ने ये कहा , या ये कहना चाहिए कि मीडिया ने मुंह में माईक घुसेड घुसेड के जबरन कुछ न कुछ कहलवाया , और उससे भी अधिक , जो कहा गया या , न भी कहा गया  , उसे पूरी तरह मसालेदार बना कर , काट छांट कर , या अर्थ का अनर्थ करके आम जनता के पास इस तरह से पेश किया जाए कि आम जनमानस किसी नतीजे या निष्कर्ष पर पहुँचने के बजाय , इतने ज्यादा आशंकाओं और अनुमानों में उलझ कर रह जाए कि मुद्दा क्या था यही पार्श्व में चला जाता है |

 सबसे बड़ी विडंबना यही है कि , ये सारा खेल मीडिया हमारे सामने , कभी सबसे ज्यादा सच तो कभी सबसे ज्यादा तेज़ के नाम पर दिन रात परोसता रहता है | किन्तु यहाँ बात मीडिया नहीं बल्कि नेताओं और अभिनातेओं के सार्वजनिक बयानों , उनके मायने और उनके प्रभाव पर बात कर रहे हैं हम |




सलमान खान ने किसी और विषय पर आयोजित एक प्रेस कांफ्रेंस में एक पत्रकार के किसी सवाल (ज्ञात हो कि , कोइ भी समाचार चैनल ये बातें नहीं दिखा बता रहा है ) के उत्तर में बोलते हुए कहा कि , आतंकवादी और कलाकार दोनों भिन्न लोग होते हैं , और कलाकार यहाँ वर्क परमिट , वीजा आदि के प्रावधानों के अनुरूप आते हैं जो खुद उन्हें सरकार मुहैया कराती है , इसलिए उनका विरोध नहीं किया जाना चाहिए | 


इस पोस्ट के लिखने तक इस मामले में आगे और वृद्धि ये हुई है कि पाकिस्तान सरकार ने न सिर्फ भारतीय चैनलों के प्रसारण पर पूरी तरह से पाबंदी लगाने की घोषणा कर दी बल्कि अपने तमाम सिनेमाघरों से भारतीय पिक्चरों के पोस्टरों तक को उतार फेंका गया गया  | कहने की जरूरत नहीं कि पूर्व में भी ऐसे तमाम समय पर , जो संवेदनशीलता , जो भावुकता , जो स्नेह भारतीय कलाकार उदार होकर व्यक्त करते हैं वो सिर्फ एक तरफ़ा है | इसका ताजातरीन उदाहरण है अभी हाल ही में बहुत सी भारतीय पिक्चरों में अभिनय करके खासा धन अर्जित कर अभी अभी पाक्सितान लौटे अभिनेता फवाद खान का जिन्होंने वापस जाते ही भारतीयों को छोटे दिल वाला करार दे दिया |



इस परिप्रेक्ष्य में दो बातें मुझे याद आ रही हैं जिनका उल्लेख करना यहाँ ठीक होगा , पहली ये कि , इन दिनों सोशल नेटवर्किंग साईट्स पर एक कथ्य बहुत तेज़ी से पढ़ा देखा जा रहा है |

क्रिकेट को राजनीति से नहीं जोड़ा जाना चाहिए और खेलों को इन दो देशीय रिश्तों के तनावों से दूर रखना चाहिए |
फिल्म और कलाकारों को भी ................

साहित्य व् साहित्यकारों को भी  ................



और इसमें और भी जो जो ,जिनका जिनका ध्यान आता हो आपको आप जोड लें ..

.तो फिर भाई लोगों सारी दुश्मनी का ठेका क्या हमारी फ़ौज और हमारी पुलिस ने ही लिया हुआ है या उनका दिमाग खराब है कि वे खामख्वा  में गोलियां बम का शिकार होकर अपनी जान गँवा रहे हैं , वो भी उन्हीं के हाथों जिनसे इन उपरोक्त वर्ग की गहरी सहानुभूति दिखाई देती है | 

और दूसरी  ये  कि , इसी बात पर एक मित्र ने बहुत सटीक टिपण्णी करते हुए कहा था कि , जब हम पाकिस्तान तो अलग थलग करने की बात करते हैं तो फिर वो अलगाव सिर्फ राजनीतिक या सामाजिक और भौगोलिक भर नहीं रह जाना चाहिए बल्कि , साहित्यिक ,सांस्कृतिक और आर्थिक रूप से भी ऐसे देशों का पूर्ण बहिष्कार करना चाहिए |


यहाँ गौर करने लायक बात यह भी है कि ,कुछ पाकिस्तानी कलाकार भारत में काम करने के कारण वहां भी निशाने पर लिए जाते रहने के बावजूद भी कभी भारत पर होने वाले आतंकी हमलों में मरने वाले निर्दोष लोगों या पीड़ितों के प्रति सहानुभूति तो नहीं ही जताते हैं , मगर जो एक काम वे कर सकते हैं और उन्हें कभी न कभी करने के लिए बाध्य होना ही पडेगा , वो भी या अपनी खुद की जान के डर या ऐसी ही किन्ही वजहों के कारण नहीं कर पाते हैं , खुल कर इस बात की मुखालफत ....

पाकिस्तानी कलाकारों को खुद भी ये समझना होगा और अपनी सरकार सियासत को भी ये समझाना होगा कि जिस भारत के टुकड़े टुकड़े करने के मंसूबे वे पाल रहे हैं , वर्षों से आतंक और हिंसा के सहारे उसे अंजाम तक पंहुचाने में लगे हैं उस देश (भारत ) का विकास उस देश की शान्ति , कहीं न कहीं, देर सवेर एक पड़ोसी होने के नाते खुद उन्हें और पाकिस्तान को भी इसका लाभ ही पहुंचाता  , खैर जैसा कि पाकिस्तान के मशहूर लेखक तारिक फ़तेह ने कहा कि ..........अफ़सोस ..अफ़सोस ..पड़ोसी अब  गटर बन चुका है |



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