इस गैज़ेट में एक गड़बड़ी थी.

शनिवार, 20 मार्च 2010

मालावती की माला से भी गंदा है ये ...इन पर भी थू थू थू




जी हां दलित मसीहा का चोला चंचा तो खूब उछला और आप सबने उसे देखा भी न सिर्फ़ देखा बल्कि भर भर के थूकम फ़जीहत भी की ..करनी भी चाहिए थी ..बेशक उससे मालावती की माला में लगे नोटों का वजन रत्ती भर भी कमी न आए और न ही शर्म उन्हें छू सके । मगर आज कुछ उससे भी भयानक उससे भी घटिया और उससे भी ....छोडोए आप खबर पढिए पहले

खबर है कि पंजाब में सड रहा है सैकडों करोड का गेहूं । खबर ये है कि अब जबकि इस गेहूं की नई फ़सल भी लगभग तैयार है तो पता चला है कि पिछले दो सालों से तैयार और जमा गेहूं जो लाखों मीट्रिक टन है ..वो अब सडने लगा है ...कारण भी तो सुनते जाईये ..उसे रखने के लिए सरकारों के पास जगह नहीं है ।गोदाम नहीं है ..वाह जिस देश में लाखों लोगों का पेट खाली है उस देश की सरकार के पास अनाज रखने के लिए जगह नहीं है और हालत ये है कि अब वो सडने के कगार पर है । पंजाब में इस वक्त 72 लाख मीट्रिक टन गेहूं पडा है जिसे केंद्र के लिए खरीदा गया था । इसमें से 68 लाख मीट्रिक टन पंजाब सरकर ने केंद्र के लिए खरीदा है जबकि 4 लाख टन फ़ूड कारपोरेशन औफ़ इंडिया ने खरीदा है । इसमें से 80 प्रतिशत गेहूं खुले में पडा हुआ है ..यानि बारिश धूप लग के एकदम सौलिड हो रहा है । और हमारी ..सरकार ..जय हो जय हो का नारा लगाने वाली ..गरीबों का ध्यान रखने वाली सरकार ...ने आम आदमी को बीस रुपए आटा खरीदने के लिए रख छोडा है ....और भूखे कितने हैं उसकी गिनती कौन करे । अब आगे की भी पढते जाईये । मौजूदा फ़सल के तैयार होते ही गेहूं समेत कुल अनाज की मात्रा बढकर 251 लाख टन हो जाएगी । जबकि पंजाब में इस वक्त सिर्फ़ 181 लाख मीट्रिक टन अनाज रखने की ही क्षमता है । यानि आने वाले समय में लगभग 70 लाख ....जी हां ....लगभग 70 लाख मीट्रिक टन अनाज ..खराब होने के लिए तैयार हो जाएगा । जबकि अभी ज्यादा समय भी नहीं बीता है जब आस्ट्रेलिया से गेहूं मंगाने की  उच्च स्तरीय सहायता ..गरीबों के लिए सरकार ने मुहैय्या कराई थी ।

     तो अब बताईए कि ..मालावती की माला से आप ज्यादा प्रसन्न हुए कि सरकार के इस नायाब प्रयास से । अरे हम आप भारतीय गणतंत्र की  गौरवमयी जनता हैं , ये आपका हमारा सौभाग्य कि कभी हमारे जनसेवक ..कभी खुद सरकार आपको हमें ..उनके ऊपर थू थू करने का सुनहरा मौका देती है ...और देती ही रहती है ..मगर सोच रहा हूं कि ...वे बेचारे जो जाने कब से भूखे प्यासे बैठे हैं ...वो थूक भी कहां पाते होंगे ??

22 टिप्‍पणियां:

  1. बात तो सही है ...थू थू करने वाली है ... शर्म इनको आती नहीं है ... ये तो थूका भी चाट लेंगे .....नेतागिरी की आड़ में नोटों की माला पहिन रहे हैं इनसे दलितों के उद्धार की कल्पना करना दूर की गोटी साबित होगी .....

    उत्तर देंहटाएं
  2. भाई जी
    थू थू से क्या होगा.
    ये तो इसके आदी हो चुके हैं

    उत्तर देंहटाएं
  3. अब नेता गीरी करनी है तो ऐसी घटनाओं को तवज्जो थोड़े ही देनी है...
    आपनें अच्छा ध्यानाकर्षण किया है,
    अच्छी पोस्ट.

    उत्तर देंहटाएं
  4. लापरवाही की हद होती है...एक तरफ देश में भुखमरी से मौतें हो रही हैं और दूसरी तरफ अनाज पड़ा-पड़ा सड़ रहा है ....ऐसे अफसरों और नेताओं को तो....बीच चौराहे के...गोली मार दी जानी चाहिए

    उत्तर देंहटाएं
  5. "झा जी एक बात बताइए अगर सबके पेट भर जायेंगे , तो विदेशी पर्यटकों को गरीबी कहाँ से दिखाएँगे
    और सूखी हड्डियों पर जो मॉस चढ़ गया , तो "स्लाम्दोग करोडपति" ओस्कार कैसे पायेंगे "
    बढिया लेख

    उत्तर देंहटाएं
  6. koi puchhe in dalalon se ki ye anaj kitne logon ki aur kitne din tak bhukh shant karega dhikkar hai

    उत्तर देंहटाएं
  7. Neta ya adhikari kabhi apne paise se kharid kar khaye tab to pata chale ki manhgai kya hoti hai.

    Ye Sonia ka Raj hai Jha Saheb Sonia Ghandi ka.

    उत्तर देंहटाएं
  8. मैंने तो थूक दिया है....अभी भी थूकना जारी है.....गला सूखने से पानी पी-पी कर थूक रहा हूँ.

    उत्तर देंहटाएं
  9. इनका तो सम्‍मान करना चाहिए पब्लिकली।

    उत्तर देंहटाएं
  10. बड़ी मुश्किल है सब के सब तो चोर हैं किसके हाथ में देश और प्रदेश की बागडोर दे जनता के लिए परेशानी बन गई है...

    उत्तर देंहटाएं
  11. यह PIL का मामला बनता है. सरकार की जवाबदेही इस मामले में तय होनी चाहिये and heads must roll.

    उत्तर देंहटाएं
  12. जितने लोग कुर्सियों पर बैठे हैं उन में से देश और देश की जनता की कितनों को परवाह है?

    उत्तर देंहटाएं
  13. भई ये गेहूँ तो सरकारी स्कूल के बच्चों के दोपहर के भोजन और गरीबों के लिए चलाई जा रही "आटा-दाल" योजना के तहत वितरण में काम आने वाला है...

    उत्तर देंहटाएं
  14. अर्थ के अनर्थशास्त्र की एक और कड़ी । बात यहीं समाप्त नहीं होती । खाद्यान्न आयात के साथ आते है विदेशी खर पतवार। गाजर घास फल फूल रही है। सुना है पवार साहब के आयात ने और भी बहुत कुछ इस 'चिर शरणदायी' भूमि पर उतार दिया है।

    उत्तर देंहटाएं
  15. हम तो गन्‍दगी में नहीं थूकते।

    उत्तर देंहटाएं
  16. कहाँ -कहाँ थूकोगे हर जगह माया का ही खेल है !

    उत्तर देंहटाएं
  17. भई ये गेहूँ तो सरकारी स्कूल के बच्चों के दोपहर के भोजन और गरीबों के लिए चलाई जा रही "आटा-दाल" योजना के तहत वितरण में काम आने वाला है..

    उत्तर देंहटाएं
  18. यहाँ यही हाल है...अंधेर नगरी चौपट राजा...

    उत्तर देंहटाएं
  19. झा जी,
    कमीशन पर कहीं बात अटकी होगी...अभी सेटिंग करा दीजिए...देखिए कैसे रातों-रात ये बोरे यहां से साफ़ हो जाएंगे...

    जय हिंद...

    उत्तर देंहटाएं
  20. हमने NDTV पर विनोद दुआ का कार्यक्रम में ये खबर देखी थी। उनके हिसाब से ये गेहूं 500 से 800 करोड़ रुपयों का है। एक अप्रैल तक 147 लाख टन गेंहूं और आ जायेगा पंजाब के गोदामों में। देश में रोज़ 20 करोड़ लोग भूखे सोते हैं और किसान को उसकी फसल का दाम मिलता नहीं है। इस बार रिकॉर्ड 810 लाख टन गेंहू होने वाला है। कम बोलने लेकिन जब भी बोलते हैं खतरनाक बोलने वाले कृषि मंत्री शरद पवार ने कह दिया है कि किसानों को उनकी फसल के वाजिब दाम नहीं मिलेंगे। ये चेतावनी किसानों के लिये कम और आढ़तियों के लिये संकेत ज़्यादा है, कि किसान का गेहूं वाजिब दाम में भी मत खरीदना। आयेगा अपने आप, लागत से भी कम में बेचने। क्या ये इंसानियत है।

    उत्तर देंहटाएं
  21. भाई आप लोग ही बार बार इस ईमान दार सरकार को जीताते है, ओर फ़िर थू थू भी करते है अभी तो युवराज जी की ताज पोशी भी तो आप सब के हाथो होनी है, अरे क्यो हिम्मत हारते है अगले साठ साल ओर इन्हे मोका दो ना,शायद सूधर ही जाये,वेसे हमे इन सब पर थूकने की जरुरत भी नही यह सब एक दुसरे पर थूअते है,फ़िरेक दुसरे का थूक चाटते ही है.... लेकिन आप लोग उदास मत हो आप को दोबारा मोका मिलेगा इन्हे जीताने के लिये

    उत्तर देंहटाएं

मुद्दों पर मैंने अपनी सोच तो सामने रख दी आपने पढ भी ली ....मगर आप जब तक बतायेंगे नहीं ..मैं जानूंगा कैसे कि ...आप क्या सोचते हैं उस बारे में..

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...

Google+ Followers