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रविवार, 6 मई 2012

सत्यमेव जयते - बात मुद्दे की








पिछले कुछ दिनों से समाचार माध्यमों में , विशेषकर मनोरंजन जगत में जो सबसे बडी खबर दस्तक दे रही थी तो थी सिने जगत में अपने प्रयोगों , कल्पना और कमाल की क्रियेटिविटी से ऑस्कर तक धमक पहुंचाने वाले आमिर खान का शो -सत्यमेव जयते । एक आम दर्शक के रूप में लोगों को जब ये पता चला कि लगभग दस चैनलों के अलावा ये एकमात्र राष्ट्रीय चैनल जिसे शायद शहरों में भुला भी दिया गया है , उस डीडी वन यानि दूरदर्शन पर भी प्रसारित होगा , तो वो समझ गए कि आमिर सिने व्यवसाय में भी पारंगत यूं ही नहीं कहलाते ।

बेशक एक दशक पहले महाभारत और रामायण सरीखे धारावाहिकों ने उन घंटों में लोगों को टीवी तक समेट दिया था किंतु उसके बाद कौन बनेगा करोडपति ही वो कार्यक्रम रहा जिसे अपने घर में म्यूट करके भी देखा जा सकता था क्योंकि साथ वाले घर से भी उसी कार्यक्रम की आवाज़ आ रही होती थी । बहुत अर्से बाद कोई ऐसा कार्यक्रम लोगों के सामने आ रहा था जिसके लिए लोगों में पहले से उत्सुकता थी ।

आखिरकार उसका पहला भाग प्रसारित हुआ । आमिर ने शुरूआत की तो लगा कि नहीं ये वैसा नहीं है कि जिसके लिए कहा जा सके कि पहले कभी देखा सुना नहीं ऐसा कार्यक्रम । वे दो आज की संघर्षशील मांओं से मिलवाते हैं जो इस बात की जीती जागती मिसाल हैं कि बेशक देश की आईएएस टॉपर युवतियां , महिलाएं ही क्यों न होती रहें , समाज की सोच और रवैया अब भी वही है । लेकिन ये तो सिर्फ़ शुरूअत भर थी , प्रस्तावना जैसी । इसके बाद आमिर मुद्दे पर आते हैं यानि - कन्या भ्रूण हत्या ।




 बाज़ार के सभी फ़ंडों-हथकंडों से परे महत्वपूर्ण बात ये रही कि यदि आज कार्यक्रम मुद्दों पर और सामाजिक सरोकारों व समस्याओं पर आधारित होने के बावजूद भी इतना रिस्पॉस पा जाए तो यकीनन ये अलग और बडी बात तो है ही । समस्या , पीडितों , आरोपियों , खबरनवीसों से सीधा सीधा रूबरू करवाते हुए कन्या भ्रूण हत्या से जुडे हर मुद्दे को टटोला और खंगाला गया । कई लोगों के लिए बहुत सी नई बातें भी थीं , मसलन जाने अनजाने आज अपराध बन चुके इस कृत्य के लिए सरकार की भी कोई न कोई नीति जिम्मेदार थी । कार्यक्रम ने ये भी बखूबी  दिखा दिया कि स्टिंग ऑपरेशन करके अपराधों का पर्दाफ़ाश होने के बाद भी स्थितियां क्यों नहीं बदलती ।


ऐसी लडाई का तरीका और उससे बदला हुआ परिणाम दिखाकर ये भी भलीभांति जता बता दिया गया कि सिर्फ़ समस्या समाधान पर बहस विमर्श करके छोडा नहीं गया है बल्कि ये कारगर है , ऐसा प्रमाणित हुआ है । आमिर ने  दोषी आरोपियों के अपराध और सज़ा के निर्धारण का फ़ैसला न्यायपालिका पर छोडते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री को एक प्रशासनिक उपाय , कन्या भ्रूण हत्या अपराध के तमाम मुकदमों के त्वरित निस्तारण के लिए एक नए फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन की गुजारिश करने के लिए एक पत्र लिखने की पहल करने की बात कही ।


ये तो अब तय है कि चाहे अलग अलग कारणों से ही सही देश का समाज अभी सक्रियता और सजगता के लिहाज़ से स्विच ऑन मोड पर है । विज्ञापन , साहित्य-सिनेमा , राजनीति और समाज तक में इन मुद्दों का दखल बढा है । ऐसे में यदि आमिर ने पूरी तैयारी और अनुभव के साथ आम जन का मुद्दा समझा समझाया और सबके सामने रखा और आम जनता पर इसका ज़रा सा भी प्रभाव पडता है तो ये यकीनन ही एक बडी सफ़लता कही जाएगी ।

इस कार्यक्रम का प्रस्तुतिकरण व रफ़्तार बिल्कुल अनुकूल रहे और अगले अंक से पहले ये तय हो जाएगा कि "सत्यमेव जयते " का प्रभाव कितना पडेगा और किन पर पडेगा । राजस्थान के आरोपी चिकित्सकों के लिए तो ये परेशानी का सबब बन ही चुका होगा । मेज़बान के रूप में जब आमिर आम दर्शकों से इस मुद्दे से जुडने का आग्रह करते हैं तो उन्हें पते व प्रतिक्रिया देने के अन्य विकल्पों को थोडा ज्यादा समय देकर दर्शकों को बताना चाहिए ।




7 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सही मुद्दे पर प्रयास है उनका। बहुत की जान आफत में आ जाएगी अब।

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  2. आपकी पोस्ट पढकर थोडी राहत मिली.एक अन्य लेख पर अभी अभी टिप्पणी करके आ रहा हूँ जहाँ कहा गया हैं कि आमिर ने मुद्दे को ठीक से नहीं उठाया.पता नहीं लोग ये क्यों नहीं समझते कि आम आदमी बुद्धिजीवियों वाली बातें नहीं समझता उसे ऐसी ही भाषा में समझाना पडता हैं.राजस्थान सरकार इस शो के प्रसारण के तुरंत बाद खुद ही सक्रीय हो चुकी हैं.आमिर खान बधाई के पात्र हैं.

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया राजन जी । यहां यही तो समस्या है कि लोग न सिर्फ़ नकारात्मक ही पहले सोचते हैं बल्कि उसी सोच पर चलते हुए उसकी असफ़लता की घोषणा भी कर देते हैं । सच यही है कि ऐसे कार्यक्रम न सिर्फ़ फ़ूहड धारावाहिकों से बहुत बेहतर और अर्थपूर्ण हैं बल्कि अगर रत्ती भर भी प्रभाव डालते हैं तो प्रयास सार्थक और अनुकरणीय है ।

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  3. शो अच्छा लगा आमिर से इसी बात की उम्मीद थी | ये मुद्दा उठाने वाले लोगों की कमी नहीं है ब्लोग जगत में कई बार ये मुद्दा उठाया गया है पर कुछ गंभीर बहस की जगह कई बार तो बस टिप्पणियों का लें देन ही हुआ , आमिर ने भी ये शो ये सोच कर किया होगा की लोग बात उनके उठाये मुद्दे की करेंगे समाज में विचार विमर्श होगा और कोई हल निकलेगा किन्तु यहाँ भी हर जगह बात मुद्दे की ना हो कर बस आमिर और उनके शो की हो रही है ये देख कर शायद आमिर को भी अफसोस होगा |

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    1. नहीं अंशुमाला जी , सिर्फ़ आमिर की ही बात नहीं हो रही है बल्कि राजस्थान सरकार के स्वास्थ्य विभाग के गलियारों में सुना है इस गर्मी में तपिश कुछ ज्यादा हो गई है यकायक । अक्सर एक दुविधा ये आती है कि फ़िर यदि अच्छे करने पर भी उन्हें अच्छा न कहें , उनका हौसला न बढाएं तो फ़िर क्या आज चल रहे तमाम भोंदू किस्म के टीवी कार्यक्रमों को गरियाने का हक चला जाता है । मैं सिर्फ़ एक बात सोच रहा हूं .............बात मुद्दे की हो रही है ...और वजह चाहे जो हो ..बात होते रहनी चाहिए

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  4. यह एक अच्छी पहल है। यदि मामूली परिवर्तन भी आ पाया,तो इसे बड़ी सफलता माना जाएगा।

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मुद्दों पर मैंने अपनी सोच तो सामने रख दी आपने पढ भी ली ....मगर आप जब तक बतायेंगे नहीं ..मैं जानूंगा कैसे कि ...आप क्या सोचते हैं उस बारे में..

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