शनिवार, 24 अगस्त 2019

आखिर कब रुकेंगी सड़क दुर्घटनाएँ



सड़क दुर्घटनाओं की खबरें अब नियमित  रूप से समाचारों में देखने पढ़ने व सुनने को मिल जाती हैं | अफ़सोस और उससे अधिक चिंता की बात ये है की इन घटनाओं में लगातार इज़ाफ़ा ही हो रहा है | दो पहिआ वाहन से लेकर चार पहिया वाहन और भारी वाहन तक कोई भी इससे अछूता नहीं है | इत्तेफाक से जहाना केंद्र सरकार मोटर वाहन अधिनियम में महत्वपूर्ण संशोधन कर चुकी है वहीं राजधानी की प्रदेश सरकार ने भी अभी कुछ समय  पूर्व ही सड़क दुर्घटनाओं की बढ़ती संख्या के कारणों का अध्ययन  करके  इसे दूर करने के लिए जरूरी उपाय समेत परिवहन परिचालन व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए कई उपचारात्मक कदम उठाए  हैं | 

इस विषय पर आगे विमर्श से पहले कुछ तथ्यों कथ्यों पर नज़र डालते हैं | परिवहन व्यवस्था में सुधार के लिए दिशा निर्देश जारी करने के उद्देश्य से दायर याचिका की सुनवाई करते हुए माननीय न्यायमूर्ति ने टिप्पणी करते हुए  कहा था की इस देश में अपराध और आतंकी घटनाओं में उतने लोग नहीं मरते जितने कि सड़क दुर्घटनाओं में रोज़ मर रहे हैं | सड़क दुर्घटनाओं   के कारण होने वाली मौतों के पीछे वजह का अध्ययन करने वाली संस्था "रोड एक्सीडेंट सेफ्टी मूवमेंट " के सर्वेक्षण में यह बात सामने निकल कर आई है की भारत में ४७ प्रतिशत  पीड़ितों की मृत्यु सिर्फ इसलिए हो जाती है क्योंकि समय पर उन्हें प्राथमिक उपचार नहीं मिल पाता | 

पिछले दो दशकों में सड़क दुर्घटनाओं में लगातार वृद्धि होने के कुछ  प्रमुख कारणों को रेखांकित किया जाए तो वे कुछ इस तरह सामने आते हैं | इन कारणों में सबसे पहला और सबसे मुख्य कारण खुद सड़कें हैं | भारतीय रोड रिसर्च संस्थान की हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि  मानक नियमों की अनदेखी रख रखाव व पुनर्निर्माण में लापरवाही तथा दिल्ली जैसे महानगरों में सडकों पर भागते वाहनों का दस गुना अधिक दबाव स्थिति को बेहद नारकीय बना रहा है | भारत जैसे देशों जहां परिवहन नियमों की अनदेखी के कारण एक्सप्रेस वे तथा विशेष कॉरीडोर में भी सड़क दुर्घटनाओं में काफी इज़ाफ़ा होता रहा है |  दिली से सटे आगरा एक्सप्रेस वे तो इन सड़क दुर्घटनाओं के कारण कुख्यात सा हो गया है | 

अगली बड़ी वजह है भारत में चलाए जा रहे व निर्मित वाहनों में अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा मानकों की भारती अनदेखी | दुर्घटना के पश्चात पड़ने वाले प्रभाव  व यात्रियों को उससे होने वाले नकसान के लिए किये गए एक परीक्षण में १० में से सिर्फ ३ ही वो भी आंशिक रूप से सफल रहीं | अन्य सात में चालाक व यात्रियों के बचने की संभावना बहुत कम रही | विडम्बना देखिये कि एक तरफ जहां नई स्कूटी मोटरसाइकिल में २४ घंटे अनवरत जलने वाली हेडलाईट का प्रयोग किया जा रहा है जबकि सर्दियों में धुंध  बीच ड्राइविंग करने के लिए प्रयोग की जानी वाली विशेष पीली रौशनी हेड लाइट का प्रयोग न के बराबर होता है  सर्दियों में धुंध व कोहरा सड़क दुर्घटनाओं का एक बड़ा कारण है | 

भारत विश्व का अकेला ऐसा देश है जहां  वाहन चलाने के लिए दिए जाने वाले लाइसेंस की परिक्षा में १० प्रतिशत से भी कम लोग फेल होते हैं | अप्रशिक्षित चालकों को लाइसेंस मिल जाना व नकली लाइसेंस प्राप्त कर/बना कर वाहन चलाना जितना भारत में आसान है वो पड़ोस के छोटे देशों में भी नहीं है | इसका दुष्परिणाम ये हुआ  आंकड़ों के अनुसार चालकों व बिना लाइसेंस या नकली लाइसेसं धारक चालाक व बिना लाइसेंस या नकली लाइसेंस धारक चालाक ही दोषी होते हैं | बस ट्रक टेम्पो  आदि में तो कई बार बड़ी दुर्घटनाओं को अंजाम देने वाचालाक वास्तव में कंडक्टर व क्लीनर तक निकले हैं |  महानगरों में बहुत काम उम्र में बहुत तेज़ गति से कार काऊंटी चलाते बच्चों ने तो मानो कहर बरपाया हुआ है | विदेश निर्मित वाहनों में असीमिति रफ़्तार की व्यवस्था वाली कारों आदि को  भारत जैसे अधिक ट्रैफिक जनसंख्या वाले देश में दौड़ाना किसी बम से कम नहीं है |  

दुर्घटना के लिए जिम्मेदार कारकों में एक और मुख्य कारण है शराब पीकर गाड़ी चलाना | "शराब पीकर गाड़ी न चलाएं " यह वाक्य लगभग हर सड़क और राजमार्गों पर लिखा होता है ,सिर्फ एक इस नियम के पालन से देश में दुर्घटनाओं की संख्या में ५० प्रतिशत तक की कमी लाई जा सकती है | एक बात और उल्लेखनीय है कि ऐसे मामलों में चालक और पीड़ित के मौत की संभावना ७८ प्रतिशत तक अधिक हो जाती है 7  शराब पीकर वाहन चलाने वाले किसी आत्मघाती आतंकी की तरह होते हैं |  

हालांकि ऐसा नहीं है की सरकार प्रशासन व पुलिस इससे चिंतित नहीं है या इनकी रोकथाम के लिए कोई उपाय नहीं कर रही है |  मई २०१८ में दिल्ली की प्रदेश सरकार ने "दिल्ली सड़क सुरक्षा नीति " को प्रस्तुत करते हुए जानकारी दी कि राजधानी दिल्ली में इस वक्त लगभग ११ करोड़ पंजीकृत वाहन हैं व प्रतिवर्ष ७ लाख नए वाहनों का पंजीकरण होता है | इसके बावजूद वर्ष २०११ से अब तक सड़क दुर्घटनाओं की संख्या में मामूली ही सही मगर कमी तो आई है | इस नीति में २०१८ -२०२० तक इन दुर्घटनाओं में मौतों की संख्या में ३० प्रतिशत तक और २०२५ तक ८० प्रतिशत की कमी उद्देश्य रखा गया है |  इसके लिए सरकार ने विस्तृत कार्ययोजना बनाई है व समय समय पर इनकी समीक्षा व कार्यवाही रिपोर्ट भी ली जाएगी |  

दूसरी तरफ केंद्र सरकार ने अभी हाल ही में मोटर वाहन दुर्घटनाओं के लिए चालकों को अधिक सजग व सचेत  करने के उद्देश्य से मोटर वाहन दुर्घटना अधिनियम में भारी संशोधन कर नियमों की अवहलेना करने के दोषियों पर अधिक जुर्माने व दंड का प्रावधान कर अपनी मंशा जाता दी है | किन्तु ये सभी उपाय, नियम तभी प्रभावी व सार्थक होंगे जब व्यक्ति खुद संवेदनशील  व जिम्मेदार होगा | फिलहाल तो ये सड़कें मौत की मंज़िल बनी हुई हैं | 

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