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गुरुवार, 16 जून 2011

असुरक्षित पडोस : गंभीर खतरा ....आज का मुद्दा





ऐसा कहा जाता है कि यदि आपके पडोस में आग लगी हुई हो तो देर सवेर उसकी आंच आपके घर तक भी आने के संभावना प्रबल हो जाती है । फ़िर भारत की नियति तो ऐसी बन चुकी है कि उसके सभी पडोसी राष्ट्र या तो शत्रुवत हैं या इतने कमज़ोर कि वे हमेशा ही भारत के लिए चिंता का सबब बने रहते हैं । भारत के भौगोलिक नक्शे से अलग होकर बने देश पाकिस्तान बांग्लादेश की अपनी खुद की स्थिति बेहद खराब होते जाने के बावजूद भारत का अहित ही उनके मुख्य एजेंडे में रहता है हमेशा ।नेपाल , श्रीलंका , बर्मा , एवं तिब्बत भूटान जैसे अपनी अंदरूनी समस्याओं पर ही फ़िलहाल काबू नहीं पा सके हैं और उन्हें भारत जैसे विकासशील देश से भी मदद की दरकार हमेशा बनी रहती है ।


पाकिस्तान की राजनीतिक व आर्थिक स्थिति प्रारंभ से ही बहुत अधिक चिंतनीय रही है और पिछले कुछ वर्षों में तो ये स्थिति चिंतनीय से बदलकर दयनीय हो गई । पिछले कुछ दशकों में पाकिस्तान में लगातार उत्पन्न हुई राजनैतिक अस्थिरता की स्थिति , अलगाबवादियों व चरमपंथियों का बढता वर्चस्व तथा प्रतिदिन चढता करोडों रुपये का विदेशी कर्ज़ का ब्याज़ ही प्रति मिनट हज़ारों डॉलर की रफ़्तार से बढ रहा है , जिसे किसी भी परिस्थिति में किसी सहायता से उतारा नहीं जा सकेगा । 


भारतीय परिप्रेक्ष्य में पाकिस्तान की अस्थिरता से पडने वाले प्रभावों को देखें तो सबसे पहली और अहम समस्या है आतंकी हमलो की आशंका । अब ये बात अनेकों बार प्रमाणित हो चुकी है कि पाकिस्तान की खुफ़िया एजेंसियां , सुरक्षा एजेंसियों के साथ साथ उसके करी शीर्ष अधिकारी व राजनीतिज्ञ , भारत , अमेरिका , और ब्रिटेन जैसे देशों के विरुद्द्ध संलिप्त आतंकियों को समर्थन देते रहे हैं । विश्व के सबसे दुर्दांत हत्यारे आतंकी ओसामा बिन लादेन का पाकिस्तान में छुपा होना एक बार फ़िर इसे साबित कर गया । इन हालातों में जब भारत के साथ कश्मीर मसले पर पहले ही दोनों देश आमने सामने होते आए हैं तो जब उद्देश्य ही विश्व शांति को खतरा पहुंचाना हो तो भारत ही सबसे पहला और आसान निशाना बचता है । मुंबई पर हुए दु:साहसी हमले ने इसक ईशारा भी कर दिया है । ओसामा की पाकिस्तान में मौजूदगी और फ़िर मौत के बाद से पाकिस्तान को हमेशा भारी-भरकम आर्थिक सहायता व सामरिक सहयोग देने वाले अमेरिका के नज़रिए में खासा बदलाव आया है । आज पाकिस्तान में भूख-बेरोजगारी, महंगाई के साथ कट्टरपंथ भी अपने चरम पर है और पूरे देश में एक हताशा फ़ैली हुई है । इसलेइ भारत को अपनी एक आंख हमेशा अपने इस दोस्त दुश्मन पर रखने की जरूरत है । 


यूरोपीय देश एवं अमेरिकी देशों के समूह के लिए एशिया में और शायद पूरे विश्व में यदि कोई एक अकेला देश सबसे बडा खतरा है तो वो है चीन । मौजूदा समय में चीन ही ऐसा अकेला देश है जो वैश्वीकरन के इस युग में भी सिर्फ़ अपने हितों और स्वार्थ से ही संबंधित आचरण करता है । यहां तक कि अतर्राष्ट्रीय मंचों पर और बडी छोटी घटनाओं पर भी उसका आधिकारिक/अनाधिकारिक बयान तक नहीं आता । सिंगापुर और तिब्बत देशों की समस्या ,विलय , विखंडन आदि के समय उसका दृष्टिकोण और रवैया पूरा विश्व देख ही चुका है । वर्तमान वैश्विक परिदृश्य  में चीन का नज़रिया इसी तथ्य से पता चल जाता है कि ओसामा बिन लादेन की मौत के बाद चीन की तरफ़ से इस तरह का बयान आया था कि यदि अब भविष्य में अमेरिका इस तरह का कोई आक्रम्ण पाकिस्तान के ऊपर करता है तो चीन पाकिस्तान के साथ खडा होगा । शायद ही अब तक ये बात गंभीरतापूर्वक सोची गई है कि विश्व का लगभग हर विकसित और विकासशील देश आज आतंक के निशाने पर है , और उसकी पीडा झेल रहा है लेकिन चीन इन सबसे खुद को अलग रखे हुए है । क्या ये महज़ इत्तेफ़ाक है कि किसी आतंकी संगठन के निशाने पर चीन नहीं है । यहां ये बताना भी उचित होगा कि अभी हाल ही में चीनी हैकरों ने अमेरिका खुफ़िया सेवा और सुरक्षा सेवा के अंतर्जालीय खातों में सेंधमारी की है । क्या इससे मिली जानकारियों का फ़ायद वे उठाएंगे या पैसे के बदले वे कहीं आगे सरका देंगे । निश्चय ही ये चिंता कहीं न कहीं विश्व शांति की सुरक्षा के आकांक्षी लोगों को भी होगी । 


भारत-चीन संबंध शुरू से ही अविश्वास और संदेह से ग्रस्त रहे हैं । ये संबंध और अधिक खराब स्थिति में तब पहुंचे जब "हिंदी चीनी भाई-भाई " कहते कहते चीन ने भारत पर आक्रम्ण करके भारत की बहुत बडी जमीन हथिया ली जो आज तक चीन के कब्जे में ही है । अब भी अक्सर कभी नियंत्रण रेखा को पार करके , कभी भारतीय प्रदेश , भूभाग को अपने नक्शे में दिखाकर तो कभी किसी भारतीय को नत्थी वीज़ा देन जैसे कार्यों से चीन भारत में अस्थिरता फ़ैलाने का प्रयास करता ही रहता है । अमेरिका सहित विश्व समुदाय को भी चीन के नक्काली कारोबार और अंतर्जाल हैकरों ने खासा परेशान किया हुआ है । 


भारत इन दिनों राजनीतिक संवेदनशीलता और सामाजिक परिवर्तन के नाज़ुक दौर से गुज़र रहा है । आम जनता और सत्ता के बीच न सिर्फ़ विचारों का बल्कि भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए आमने सामने का संघर्ष शुरू हो चुका है । व्यवस्था के खिलाफ़ जनमानस का बढता असंतोष और सुधार के बजाय दमन का रुख अख्तियार करने वाली सरकार का रवैया देखकर ये अंदाज़ा सहज ही लगाया जा सकता है कि आने वाले समय में कठिन परिस्थितियां उत्पन्न होंगी । भारत का अहित सोचने वाली तमाम शक्तियों , देशों , संगठनों के लिए ये अवसर बहुत ही मह्त्वपूर्ण होगा । वे निश्चित रूप से देश में चल र्हे इस उठापटक का फ़ायदा उठा कर अपने मंसूबे पूरा करने का प्रयास करेंगे । ऐसे में न सिर्फ़ सरकार , प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों बल्कि सिविल सोसायटी व ऐसे तमाम जनसमूहों को भी सजग व सचेत रहना होगा । देश की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार तमाम सुरक्षा संस्ताओं को अपने टॉप एलर्ट मोड (Top Alert Mode )में रहने के लिए खुद को तैयार रखना चाहिए । 

2 टिप्‍पणियां:

  1. और हम चैन से सो रहे है सार्थक आलेख ऑंखें खोलने में सक्षम , आभार

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  2. सचेत करती पोस्ट....... बहुत बढ़िया आलेख

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मुद्दों पर मैंने अपनी सोच तो सामने रख दी आपने पढ भी ली ....मगर आप जब तक बतायेंगे नहीं ..मैं जानूंगा कैसे कि ...आप क्या सोचते हैं उस बारे में..

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