मंगलवार, 6 अगस्त 2024

दुर्घटनाओं के लिए क्यों नहीं तय हो पाती किसी की जिम्मेदारी ??

 





दुर्घटनाओं के लिए क्यों नहीं तय हो पाती किसी की जिम्मेदारी ??


इस देश में कुछ बातें असाधारण और बेहद चिंताजनक होते हुए भी , इतनी बार दोहराई जा चुकी हैं कि वो अब साधारण बातें और रोज़ाना की दिनचर्या में से एक जैसी ही बन गई हैं या शायद बना दी गई हैं।  हमारे आसपास लापरवाही के कारण होने वाली  सैकड़ों दुर्घटनाएं , फिर चाहे वो कोई रेल दुर्घटना हो , किसी समारोह आयोजन में अचानक मची भगदड़ हो या फिर हाल ही में दिल्ली जैसे महानगर के बीचोंबीच बारिश के पानी में डूब कर तीन युवा बच्चों की मौत , या दिल्ली में ही  खुले नाले में गिर कर एक महिला और उसकी बच्ची की मौत ।  ये तमाम घटनाएं , दुर्घटनाएं , बार बार घटती हैं , हर साल घटती हैं , बस समय और स्थान बदल जाता है। 

इन दुर्घटनाओं के तुरंत बाद दो काम करके आगे बढ़ जाने का जो चलन चला आ रहा है वो जैसे अब एक नियति ही बन चुका है।  दुर्घटना के पीड़ितों को आर्थिक सहायता के नाम पर कुछ अनुदान राशि देने की घोषणा और उसके साथ ही दुर्घटना की जांच करने के लिए किसी जांच दल , आयोग का गठन करके रिपोर्ट आने पर दोषियों को बख्शे नहीं जाने का दावा।  जबकि असलियत में इन तमाम दुर्घटनाओं के लिए जिम्मेदार संस्था , अधिकारी या विभाग तक की पहचान करके उसे क़ानून की चौखट तक ले जाना ही सबसे असंभव कार्य हो जाता है।  

दिल्ली के कोचिंग सेंटर दुर्घटना मामले को देख कर इसे आसानी से समझा जा सकता है , जहां पुलिस ने जांच के नाम पर कोचिंग संस्थान के गेट को उखड़वा कर उसकी मजबूती जांच परख कर रही है वहीँ दोषी के रूप में पकड़ लिया एक वाहन चालाक को ,बकौल पुलिस जिसकी तेज़ रफ़्तार के कारण ही जलभराव का पानी बेसमेंट में भर गया और छात्र डूब कर मर गए।  जांच में कोचिंग संस्थान के मालिक , उस केंद्र के संचालक , मैनेजर , व्यवस्थापक , भवन में अवैध रूप से पुस्तकालय बनाने , इसकी अनुमति देने वाले और ऐसा होते देने रहने वाले तमाम , इन दर्जन भर लोगों को छोड़कर दोषी हुई वो कार जिसके हिचकोले से कोचिंग संस्थान का गेट टूट गया।  अदालत ने भी ये सब देखकर पुलिस और जांच एजेंसियों को कड़ी फटकार लगाई।  

ऐसी ही एक दूसरी दुर्घटना , जिसमें दिल्ली नगर निगम ने एक बड़े नाले की मरम्मत करते हुए उसे खुला छोड़ दिया जहां बारिश के जलभराव में एक महिला और उसकी बच्ची की गिर कर मृत्यु हो गई और अभी तक दिल्ली विकास प्राधिकरण और दिल्ली नगर निगम के बीच एक दुसरे को दोषी ठहराने की कवायद जारी है।  

जिस तरह से भीड़ का अपराध या भीड़ में किसने कौन का अपराध किया ये तय कर पाना हमेशा ही दुरूह कार्य होता है ठीक ऐसा ही होता किसी भी दुर्घटना के लिए जिम्मेदार आरोपियों को और यदि ये सरकारी महकमा हुआ तो ये और भी अधिक कठिन बल्कि बेहद दुष्कर हो जाता है।  एक विभाग का नाम आते ही उसके सहयोगी अन्य किसी न किसी विभाग पर भी ऊँगली उठती है।  जितने विभाग उनके उतने कर्मचारी अधिकारी जो , सभी सम्बंधित हैं या फाइल कागजातों में सबके नाम आ जाते हैं ऐसे में फिर सब एक दूसरे क बचाने में लग जाते हैं।  

नाले में गिर कर मृत्यु वाले  हादसे मामले में मुकदमे की सुनवाई करते हुए आखिरकार न्यायालय को सख्त रुख अपनाना पड़ा है और उसने सीधे सीधे जांच एजेंसी और दोषी संस्थाओं से आरोपियों की पहचान कर उन पर कार्रवाई करने अन्यथा अदालत द्वारा स्वय आदेश देकर ऐसा किए जाने की सख्त चेतावनी दी गई  है।  

जब दुर्घटनाओं के लिए किसी की जिम्मेदारी तय करने में हम उलझे रह जाते हैं तो फिर दुर्घटना के कारणों , और उस दुर्घटना से सीख लेकर भविष्य में ऐसी दुर्घटनए न हों इसके लिए विचार और उपाय आदि पर काम करना तो बहुत दूर की कौड़ी होती है।  असल में हालात तो ये है कि कोई भी दुर्घटना का समाचार और लोगों का उससे सरोकार भी सिर्फ और सिर्फ तभी तक रहता है जब तक कोई और नई दुर्घटना हमारे सामने नहीं आ जाती।  ये देश ऐसे ही चलता है , ऐसे ही चलता रहा है।  


बुधवार, 10 अप्रैल 2024

भ्रष्टाचार के दलदल में फंसी : केजरीवाल एन्ड पार्टी

 







जी हाँ अब तो लोगबाग भी , कभी लोगों के बीच से ही अचानक किसी सिनेमाई अंदाज़ में सीधे दिल्ली की बागडोर थाम कर सत्ता में आई आम आदमी पार्टी , को इसी नाम से बुलाने लगे हैं , केजरीवाल एन्ड पार्टी।  और ऐसा इसलिए है क्यूंकि जनलोकपाल लाकर राजनैतिक भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने की मांग और उद्देश्य से गढ़ी गई पार्टी ,के शुरूआती जुझारू लोग जो समय रहते ही सब कुछ भांप समझ कर अलग हो गए थे उसके बाद बचे तमाम बड़े राजनेता , और किसी आरोप में नहीं बल्कि भ्रषटाचार से अवैध धन कमाने और उसके दुरुपयोग में एक एक करके जेल जा रहे हैं और लाख दलीलों और तर्कों के बावजूद भी अदालत को अपनी बेगुनाही के इरादे से भी संतुष्ट नहीं कर पा रहे हैं।  

आज आम आदमी पार्टी और इसके मुख्य बचे हुए संयोजक , बचे हुए इसलिए क्यूंकि कभी , इसी भ्रष्टाचार के विरूद्ध शुरू किये गए तथाकथित संघर्ष के प्रणेता अन्ना हज़ारे और सभी बेहतरीन साथी , पूर्व प्रशानिक अधिकारी किरण बेदी , पूर्व न्यायमूर्ति संतोष हेगड़े , साहित्यकार कवि कुमार विश्वास , सामाजिक आंदोलनकारी योगेंद्र यादव , राजनैतिक साथी कपिल मिश्रा और तमाम वो लोग जिन्हें कहीं न कहीं और कभी न कभी ये एहसास हो गया था कि सब कुछ वैसा नहीं है जैसा लोगों को दिखाया और बताया जा रहा है , वे सब धीरे धीरे अरविन्द केजरीवाल का साथ छोड़ते गए और इस जगह को भरने के लिए आए कौन , संजय सिंह और भगवंत मान जैसे राजनेता , इसका दुष्परिणाम सामने ही है।  




अरविन्द केजरीवाल की गिरफ्तारी की खबर पर अपनी गैर जरूरी प्रतिक्रिया देने वाले और बाद में बुरी तरह से फटकार खाने वाले पश्चिमी देशों के साथ साथ देश और दिल्ली को भी ये जानना बहुत जरूरी हो जाता है कि एक तरह जो राजनैतिक दल , बाकायदा अपने चेहरे और अपनी बात कहने के लिए लाखों रुपये प्रचार प्रसार पर खर्च कर रहा था और बार बार ये जता और बता रहा था कि , राजधानी दिल्ली की शिक्षा और चिकित्सा व्यवस्था में , पार्टी और उसकी नीतियों या परिवर्तनों के कारण क्रांतिकारी बदलाव आए और लाए गए , और फिर रात के अँधेरे में यही अच्छे लोग , अच्छी सोच और नीयत वाले लोग , अचानक से शराब बेच कर और बेच कर नहीं बल्कि शराब बेचने खरीदने और पीने की होड़ लगाकर पैसा जुटाने की जुगत में लग गया।  

फिलहाल जो स्थिति आम आदमी पार्टी के तमाम उन राजनेताओं की , जिनका या जिन जिन का इस शराब बेचने के नियम कायदे को बदल कर पैसा बनाने के शर्मनाक अपराध से थोड़ा सा भी तालमेल निकल सकता है , उन सबको अपने ऊपर कानून की तलवार लटकती दिख रही है और जो इस अपराध को रचने और करने के प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए हैं वे सब निरंतर अपने ऊल जलूल तर्कों और बहुत सी गैर जरूरी याचिकाएँ लगा लगा कर निरंतर इस दलदल में नीचे को ओर धँसते जा रहे हैं।  आश्चर्य इस बात पर भी होता है कि आम आदमी पार्टी के तमाम राजनेताओं की पैरवी कर रहे हैं अधिवक्ता अभिषेक मनु शिंगवी ,जो कांग्रेस के जाने माने नेता हैं , वही कांग्रेस जिसे आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में सिरे से ठिकाने लगाया था , गांधार नरेश शकुनि ने कुरु साम्राज्य से बदला लेने के लिए ही महाभारत करवाया था कहते हैं , बाकी तो सब वही जाने।  


सोमवार, 1 जनवरी 2024

कई सुधारों की दरकार में : कारागार प्रशासन व्यवस्था

 





अभी हाल ही में सुर्खियों में आया समाचार जिसमें एक फोन निर्माता कंपनी के मालिक जो एक आर्थिक अपराध में तिहाड़ केन्द्रीय कारागार में निरुद्ध है , आरोपी हरिओम राय से जेल में सुविधा दिए जाने के नाम पर जेल कर्मियों ने डरा धमका कर  पांच करोड़ रुपये वसूल लिए।  चिंताजनक  बात यह नहीं है कि देश की राजधानी दिल्ली और कभी आदर्श कारागार के रूप में माना जाने वाला तिहाड़ प्रशासन पर इस तरह से से आरोप लगा है।  

गंभीर बात तो ये है कि एक के बाद एक राजनेता सत्येंद्र जैन से लेकर ठगी के आरोपी सुकेश चंद्रशेखर जैसे कारागार में पहले से निरुद्ध आरोपियों ने जेलकर्मियों द्वारा इसी तरह के और इससे भी कई तरह के गम्भ्भीर अनुचित क्रियाकलापों की शिकायत की है।  ध्यान देने की बात ये भी है की है प्रोफ़ाइल विचाराधीन  बंदियों/आरोपियों से जेल कर्मियों द्वारा उगाही की ये कुछ वो घटनाएं हैं जो जाने अनजाने समाचार माध्यमों में आ गईं।  दूसरी ये कि जब आर्थिक कदाचार/भ्रष्टाचार आदि मामलों के ऐसे हाई प्रोफ़ाइल बंदियों के साथ यह सब घटित हो रहा है तो ऐसे में साधारण कैदियों की दशा का अनुमान लगाना सहज है।  

कारागारों की छवि किसी भी काल में समाज में अच्छी नहीं रही है किन्त ब्रिटिश औपनिवेशिक काल में कारागार -यातना, सामूहिक दंड और मृत्यु दंड देने की कोठरी बन कर रह गई थी।  जेलों की अमानवीय हालातों को राजनैतिक बंदियों द्वारा  महसूस और अनुभव करने के बाद जेलों में दंड , प्रायश्चित और सुधार के लिए लाए गए बंदियों के लिए ,उन्हें रखे जाने से लेकर , उनसे श्रम और सेवा लिए जाने वाले , सुधारने के साथ साथ शिक्षा स्वास्थ्य जैसी बुनियादी जरूरतें सुनिश्चित करने के लिए बाकायदा कारागार नीति नियमों को संहिताबद्ध कर दिया गया।  

कभी इसी तिहाड़ कारागार में बंदियों के सुधार और उन्हें मुख्य धारा में लाने के लिए विख्यात पुलिस प्रशासक किरण बेदी ने बहुत से नए प्रयोग और प्रयास किए थे।  आज वही केंद्रीय कारागार , थोड़े थोड़े समय बाद अपने व्यवस्थाओं की अनियमततताओं और कदाचार के लिए समाचार में आए तो ये दुःख और चिंता की बात है।  

कारागार तिहाड़ देश की राजधानी दिल्ली का केंद्रीय कारागार होने के साथ साथ देश के सबसे विशाल कारागार में से है।  कैदियों के वर्गीकरण के आधार पर तिहाड़ एक दर्जन से अधिक कारगार में बंदियों को निरुद्ध रखा जाता है।  इसमें गंभीर अपराधों में लिप्त आरोपियों , बंदियों, महिला बंदियों तथा राजनैतिक बंदियों के लिए अलग अलग कारागारों की व्यवस्था है।  

कारागार प्रशासन की विफलता से जुडी घटनाये प्रदेश के कारागार प्रशासनों के विषय में सामने आती रही हैं।  
ऐसी ही एक बड़ी घटना को पिछले दिनों पजाब राज्य के एक कारागार में अंजाम दिया गया था। बिहार का कारगर प्रशासन तो लालू यादव मामले में बाकायदा फटकार तक खा चुका है।  महाराष्ट्र , बंगाल , सहित और बहुत  से राज्यों की कारागारों से अनेक तरह की अनियमितताओं ,भ्रष्टाचार के समाचार सामने आते रहे हैं।  

चाहे छापे के दौरान बंदियों से मोबाइल मिलने की बात हो या फिर जेल के अंदर से ही बड़े गंभीर अपराधों की साजिश षड्यंत्र बनाने वाली बंदियों की गैंग की खबरें , जेल के अंदर चल रही पूर्व मंत्री की सेवा मालिश हो या अब वीवो के मालिक हरिओम राय से सुविधा शुल्क के रूप में लिया जाने वाला पांच करोड़ , हर घटना इस बात का इशारा कर करती है की केंद्रीय कारागार तिहाड़ प्रशासन में अब कुछ भी ठीक नहीं चल रहा है।  

कारागार राज्य का विषय होता है इसलिए इसका दायित्व प्रदेश सरकार पर होता है।  राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और देश की सबसे संवेदनशील जेल होने के कारण भी ये बहुत जरूरी है कि केंद्रीय कारागार की सारी  व्यवस्थाओं को अधिक दुरुस्त व पुख्ता किए जाने विषयक सभी अनुशंसित उपायों पर त्वरित अमल किया जाए।  



लेखक स्वतन्त्र टिप्पणीकार हैं।  

बुधवार, 22 नवंबर 2023

गाँधी परिवार से वसूली शुरू : प्रवर्तन निदेशालय ने ज़ब्त किए 752 करोड़ मूल्य की संपत्ति

 


मोदी सरकार जिन दो बातों के लिए पहले ही दिन से नो टोलेरेंस की नीति अपनाए हुए थी वो थी आतंकवाद के विरुद्ध खड़े होना और दूसरी भ्रष्टाचार के खात्मे का संकल्प।  प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा था कि " देश और लोगों की संपत्ति में न तो खुद खाऊँगा और न ही किसी को खाने दूँगा।  उस वक्त शायद उन्होंने ये नहीं कहा था कि , अब तक जो खाया और अघाया घूम रहा हैं वो भी सारा निकाल लूंगा।  

मोदी सरकार के आते ही और सबसे बढ़कर शासन की नीति और प्रशासन का रुख देख कर सालों से घोटाले कर रहे , फर्जी धन्ना सेठ लोग अपने ऊपर क़ानून का शिकंजा कसता देख कर निकल भागे और ऐसा भागे कि आज तक विदेश में भागे भागे छिपे छिपे फिर रहे हैं और सरकार ने उन देशों से भी मित्र नीति के तहत वहां उनका जीना मुहाल किया हुआ है।  

इससे इतर राजनीति का चोला पहन कर , गरीबों के कल्याण और गरीबी हटाओ के नारों से दशकों तक देश  शासन करने वाले लोगों के घोटालों की जब फेहरिश्त खुली तो आज हालात ये हो गए कि , सब के सब , भ्रष्टाचार के हमाम में बिलकुल नंगे निकले।  आज सब के सब अदालतों से विभिन्न तरीकों और आधार पर जमानत लेकर अपनी खाल बचाने की जुगत में लगे हैं।  

देश की राजनीति में कभी एक रसूख रखने वाला गाँधी परिवार भी , आर्थिक अनियमितताओं और उससे भी अधिक इरादतन किए गए आर्थिक अपराधों में संलिप्तता के आरोप से खुद को नहीं बचा सका।  बार बार लोगों द्वारा उठाया गया प्रश्न कि बिना किसी , कारोबार व्यापार के आखिर गांधी परिवार की आय और संपत्ति में इतने दिनों तक इतना बड़ा इज़ाफ़ा कैसे होता रहा के उत्तर में लोगों को गांधी परिवार द्वारा किए ,कराए जा रहे घोटालों के सच के रूप  में सामने आया , 

ऐसा ही एक घोटाला है नेशनल हेराल्ड घोटला। नेशनल हेराल्ड की स्थापना और संपादन जवाहरलाल नेहरू ने भारत के पहले प्रधान मंत्री बनने से पहले किया था। अखबार ने 2008 में अपना परिचालन निलंबित कर दिया था क्योंकि उस पर ₹90 करोड़ से अधिक का कर्ज था, जिसे कथित तौर पर चुकाया नहीं गया था। वर्ष 2015 में श्री सुभ्रमण्यम स्वामी द्वारा दायर एक शिकायती वाद में ये आरोप लगाया गया कि गाँधी परिवार ने गैर कानूनी तरीके से करोड़ों रुपये का लाभ कमाया।  

अदालत द्वारा मामले का संज्ञान लेकर मुकदमा चलाए जाने के विरुद्ध गांधी परिवार निचली अदालत से लेकर सर्वोच्च न्यायलय तक पहुंचा लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए और गांधी परिवार को प्रथम दृष्टया दोषी मानते हुए गांधी परिवार की दलील खारिज कर मुकदमा जारी रखने का आदेश दिया।  यही कारण रहा कि राहुल सोनिया को जमानत याचिका दायर कर जमानत भी लेनी पड़ी तथा दोनों आरोपी अभी जमानत पर ही हैं।  

उधर प्रवर्तन निदेशालय ने लगातार  पूछताछ और जाँच के बाद कल गांधी परिवार की 752 करोड़ रूपए के मूल्य की संपत्ति ज़बात कर ली।  इस कार्रवाई को चुनाव से पहले सरकार द्वारा विपक्षी दलों पर दबाव बनाने जैसा ही घिसा पिटा राग बेशक कांग्रेस गा रही लेकिन लेकिन देश की जागरूक अवाम अब ये सारे खेल और दांव पेंच पहले ही देख चुकी है।  

समय आ गया है कि देर सवेर , ऐसे तमाम राजनैतिक अपराधी जिन्होंने देश और सरकारी कोष की संपत्ति अपने और अपनी परवारों के नाम कर ली उन्हें न सिर्फ उनके अपराध के लिए दंड मिले बल्कि ऐसी तमाम संपत्ति जब्त कर दोबारा राजकोष में जमा कर दिया जाए , 

गुरुवार, 9 नवंबर 2023

कोरोना से लेकर प्रदूषण तक : बेबस और बेकाम दिल्ली सरकार

 

कुछ वर्षों पूर्व जब पूरी दुनिया चीन द्वारा फैलाई गई महामारी कोरोना की चपेट में आकर पूरी दुनिया में हाहाकार मचा हुआ था।  उन दिनों भी दुनिया और देश भर में कुछ लोग व् सरकारें ऐसी भी थीं जिनके गैर जिम्मेदाराना व्यवहार , व्यवस्था और नीतियों के कारण दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों में चिकित्सीय व्यवस्था की स्थिति और अधिक नारकीय व दयनीय होकर रह गई थी।

इन्ही में से एक रही दिल्ली सरकार और उनके नुमाइंदे।  कोरोना तो चलिए खैर बीती बात हो गई अभी दो माह पूर्व ही एक बार फिर से दिल्ली सरकार , मुसीबत पड़ते ही भाग खड़ी हुई और आदतन सारा ठीकरा दूसरों पर फोड़ दिया।  ये अवसर था जब पंजाब हरियाणा से होता हुआ अथाह वर्षा जल राजधानी दिल्ली में एक सप्ताह तक बाढ़ की त्रासदी ले आया।  दिल्ली सरकार चुपचाप तमाशबीन होकर सब देखते रहने के अलावा कुछ भी नहीं कर सकी।

उपरोक्त दोनों ही आपदाएं अचानक आईं थीं इसलिए हो सकता है की सरकार और मशीन री को इनसे निपटने के लिए पर्याप्त समय और संसाधन शायद नहीं मिल सका हो , परन्तु इन दिनों राजधानी क्षेत्र की भयंकरतम दूषित हवा से निपटने के दावे तो पिछले पांच सात वर्षों से किए जा रहे हैं परन्तु इसका परिणाम और प्रभाव वही -ढाक के तीन पात।

प्रदूषण को नियंत्रित करके वातावरण स्वच्छ किये जाने का लक्ष्य तो दूर ,हालात तो दिनों दिन अधिक भयावह होते जा रहे हैं और ऐसे में एक बार फिर से दिल्ली सरकार अपने ढाई करोड़ नागरिकों को इस वायु प्रदूषण से राहत  देने के लिए सिर्फ यही कारगर ऊपर लाइ है कि पड़ोसी राज्यों तथा केंद्र की भाजपा सरकार पर सारा दोष मढ़ दिया जाए।

इत्तेफाक से पिछले कुछ वर्षों से पंजाब सरकार द्वारा स्थानीय किसानों को पराली जलाने से नियंत्रित नहीं कर पाने के लिए पूर्व की कांग्रेस सरकारों को कोसने वाली आम आदमी पार्टी की ही अपनी सरकार पंजाब में भी बन जाने के बाद अब पंजाब पर दोषारोपण का खेल भी खटाई में पड़ गया है।

दीपावली के कुछ ही दिनों बाद जब महापर्व छठ पूजन के लिए सभी यमुना नदी और घाटों पर पहुँचेगे तो हर साल की तरह इस बार भी यमुना नहीं के भयानक प्रदूषण स्तर  की बात भी निकल फिर सामने आ जाएगी।  सरकार  पूरी तत्परता से केंद्रीय सरकार व् एजेंसियों पर सारा दोषारोपण करके इतिश्री कर लेगी।

असल में प्रदूषण सहित किसी भी बड़ी बुनियादी जरूरत और समस्या पर दिल्ली की राज्य सरकार ने कभी भी गम्भीरतापूर्वक कुछ नहीं किया यही वजह है कि अभी हाल ही में दिल्ली सरकार द्वारा प्रस्तावित रेड लाइट ऑन गाड़ी ऑफ़ जैसे अव्यवहारिक योजना को न्यायपालिका ने बिना जांचे परखे दोबारा लागू करने से रोक दिया।  देखा जाए तो सरकार का इसमें कोई दोष भी नहीं है क्यूंकि जैसे जैसे कारनामे/घोटाले को अंजाम देने में राज्य सरकार और उसके नुमाइंदे लगे रहे उसके बाद प्रदूषण जैसे छोटी मोटी समस्याओं के लिए समय ही कहाँ मिल पाता है।

बहरहाल , थोड़े दिनों में तेज़ हवाएं और बारिश शायद दिल्ली और आसपास के क्षेत्र पर छाए धुंए और धुल के गुबार को काम और ख़त्म तो कर देंगे किन्तु इस बीच जाने कितने ही नवजात शिशु, वृद्ध और रोगी , स्वच्छ हवा में सांस की कमी के कारण असमय ही काल कवलित हो चुके होंगे और जाने कितने और इस कतार में शामिल हो जायेंगे।

यह बहुत दुखद स्थिति है कि , अपनी समस्याओं के समाधान खोजने और निपटने के लिए ही समाज अपने लिए सरकारोंब का गठन करती है , बड़े विशवास के साथ अपने मत देकर अपना प्रतिनिधि बना कर जिन्हें चुनती है वे सालों साल सरकार  में बने रहते हैं और उधर दूसरी तरह ये समस्याएं भी सालों साल यूँ ही बनी रहती हैं।

रविवार, 19 फ़रवरी 2023

ये देश जो भारत है , अब हिन्दुस्तान होना चाहिए : बाबा बागेश्वर के संकल्प के साथ सम्पूर्ण सनातन समाज

 




 

भूत पिशाच निकट नहीं आवे , महावीर जब नाम सुनावे।  भगवान हनुमान बजरंगबली के अनन्य भक्त बाबा बागेश्वर महाराज के हुंकार के साथ आज सम्पूर्ण सनातन समाज का मानस जिस तरह से जुड़ गया है वो एक संयोग भर नहीं है।  बाबा बागेश्वर महाराज का आज , बाबा बागेश्वर का तेज , प्रखर वाणी और लहू को जीवित कर देने वाली स्पष्ट बात।  एक तरुण सनातनी , बजरंगबली की हनमान चालीसा पढ़ते पढ़ते पूरे सनातन समाज को , उनकी चेतना को , सो चुकी धार्मिक निष्ठा को , भूल चुके अपनी अपार शक्ति  ,अकाट्य बल बुद्धि को बड़े प्यार से और बड़े ललकार से जगा रहे हैं , और यही आज सनातन विरोधियों और धर्म द्रोहियों को अखर रहा है।

हालात इतने अधिक दयनीय हैं कि , पूरे कायनात पर हरी चादर फैलाने को उद्धत ,जेहाद और फतवों के सहारे सबको डराने मिटाने वालों के साथ आज वे भी खड़े होकर सिर्फ रामायण ,रामचरितमानस का ही अपमान नहीं बल्कि स्वयं भगवान् पर भी लांछन उठा कर अपने संस्कारों में घुले विष प्रमाण दे रहे हैं।  आप सुनिए इस तरुण सन्यासी युवा हनुमान भक्त बाबा बागेश्वर महाराज की बातों को , देखिये उनको , उनके माध्यम से लाखों लोगो को हनुमान जी की भक्ति , स्नेह , प्रसाद पाए लोगों के सुकून को , सुख को और उन पर उनके विशवास को।

वो कहते हैं , अपने माँ और पिता की सेवा करो क्यूंकि वही ईश्वर हैं वही भगवान् हैं , सच भी तो है , वे चेताते हैं , अपनी बहनों माताओं को कि , आँख कान और मस्तिष्क सिर्फ इतना तो खुला जरूर रखो कि कल को तुम्हारे माँ ,  तुम्हारे पिता ,तुम्हारे भाई सबको तुम एक मृत देह भर के रूप में , कई बार सैकड़ों टुकड़ों में ,और कई बार तो वो भी नहीं तुम नहीं मिलो।  सबसे आसान है अपने माँ पिता परिवार और समाज पर विश्वास रखो न उंनसे बेहतर तुम्हारे लिए कोई नहीं सोचेगा।

अब वो कह रहे हैं कि इस देश को हिन्दू राष्ट्र हो जाना चाहिए , ये देश जो जम्बूद्वीप था उसे कब भारत से इंडिया बना दिया गया पता भी नहीं चला अब पिछले कुछ सालों से फिर से भारत सा दिख लग रहा है मगर ये जो , बीच बीच में उपद्रवी तत्व जिन्हें पुरातन काल में राक्षसी , शैतानी , विघ्नकारक जैसे रूपों नामों से जाना जाता रहा है आधुनिक काल में इन्हें सिर्फ एक ही बात से आसानी स्पष्ट पहचाना जा सकता है , ये द्रोही होते हैं , फुकरे एकदम निठल्ले , दुनिया के हर बात और काम में नकारात्मकता के वाहक , विध्वसंक वृत्ति के लोग , इसलिए समग्र विकास , संगठित समाज , सभ्य और संवेदनशील प्रशासन के लिए फिर यही होना चाहिए।

आज देश में राम का मंदिर और महादेव का प्रांगण बन रहा है कहीं कृष्ण सज रहे हैं कहीं खाटू वाले श्याम , कहीं जय माता दी हो रहा है तो कहीं बजरंग बली की जय , कालों की काल , माँ काली दुर्गा की हुंकार पताका चहुँ और लहराने को उद्धत है , और जिन्हें यही , बस यही तो कष्ट है , उनकी मति भ्रष्ट है।  देखिए मामला सिर्फ इतना सा है , बाबा बागेश्वर से लेकर बाबा रामदेव तक , सिर्फ एक ही मत एक मानस , एक ही प्रार्थना , एक ही आशीर्वाद , एक ही हुंकार , एक ही ललकार , एक ही सिर्फ एक , सबने अपना पकड़ रखा है ,जकड रखा है , तुम भी अपना और अपने धर्म के साथ रहो , कर्म धर्मनिष्ट हो।


 

शनिवार, 24 अप्रैल 2021

लाखों लोगों की मौत का जिम्मेदार है चीन

 



पूरी दुनिया में लाखों लोगों को मौत के मुँह में धकेलने के लिए ज़िम्मेदार , विश्व के सबसे धूर्त और दुष्ट राष्ट्र चीन को वैश्विक मंचों पर जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकना , इतनी सारी मौतों के लिए उसे कोई दंड तो दूर उसे इस अपराध का बोध तक न करा पाना , सारी वैश्विक सस्थाओं और शक्तियों के मुंह पर एक करारा तमाचा है। आज चीन इन सबसे निश्चिंत होकर आराम से बैठा हुआ है और दुनिया के सारे चौधरी बने फिरते देश सुइयां तलाशते फिर रहे हैं।  

रही बात भारत के वर्तमान हालात की , तो अनुमान तो पिछले बरस ही लगा लिए गए थे की दुनिया में इस बीमारी से सबसे ज्यादा लोग , लगभग 7 करोड़ लोग , पीड़ित होकर अपनी जान गँवा बैठेंगे।  बहुत लोगों ने मंसूबे भी शायद यही पाले हुए थे और देश से लेकर विदेश तक और बाहरी से लेकर अपनों तक की दोस्ती दुश्मनी के बीच भारत पहली लड़ाई जीत कर बाहर निकल ही आया था कि अब इस दूसरी लहर ने अधिक घातक दस्तक दे दी।  

हमारी कीड़े मकोड़े जैसे जनसंख्या , सालों से चला आ रहा कुप्रबंधन और कुव्यवस्था , आपदा विपदा के समय भी लोगों का धूर्त और स्वार्थपूर्ण आचरण , नियामक और नियंत्रक एजेंसियों का अभाव और सबसे अधिक सरकारों , प्रशासन , व्यवस्था में किसी भी तरह के तालमेल की भारी कमी।  ऐसे में भारत जैसे जनसंख्या विस्फोट वाले देश में यदि इस तरह का चिकित्स्कीय आपातकाल आकर सबको हैरान परेशान कर रहा है तो ये भारत की नियति है।  

लेकिन निकल तो हम इस आपदा से भी जाएँगे , तब तक खुद को सुरक्षित और स्वस्थ रखना ही अभी सबसे अधिक जरूरी है।  
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