| गुटखा : एक धीमा जहर |
आज से एक दशक पहले तक आम लोगों ने यदि किसी पान मसाले के बारे में देखा सुना था या कि उपयोग किया करते थे तो वो शायद पान पराग और रजनीगंधा हुआ करता था । उसकी कीमत उन दिनों भी आम पान मसाले या सुपाडी से कुछ ज्यादा हुआ करती थी । और लोग बडे शौक से उसे खाया चबाया करते थे । मगर तब तक ये एक बुरी लत नहीं बनी थी और न ही तब आज की तरह घटिया पान मसाले जो अब गुटखे के नाम से प्रचलित हैं , का चलन इतने ज़ोरों पर था । मगर पिछले दस वर्षों में इस गुटखे खाने का चलन इतना जोर पकड गया है कि अब ये एक धीमे ज़हर के रूप में सबको डसता जा रहा है । सबसे दुख की बात तो ये है कि इस गुटखे खाने की लत के शिकार सबसे अधिक ११ वर्ष से ४० वर्ष की आयु के हैं ।
बिहार , उत्तर प्रदेश , बंगाल , उडीसा, दिल्ली , आदि राज्यों में तो प्रति वर्ष इसकी खपत में लगभग ३८ प्रतिशत की वृद्धि ही ईशारा कर रही है कि ये अब एक नशे के लत की तरह सबको जकडता जा रहा है । आज बाज़ार में सिर्फ़ पचास पैसे एक रुपए के पाऊच में उपलब्ध गुटखे का ये पैकेट ,दांतों के खराब होने मुंह एवं गले के कैंसर , गुर्दे , आमाशय, आंत आदि सबके लिए बेहद ही घातक साबित होता है । इसके ज़हरीले होने का प्रमाण इस बात का उदाहरण अक्सर देकर किया जाता है कि यदि किसी गुटखे के पाऊच में थोडे से गर्म पानी की बूंदों के साथ ..ब्लेड के टुकडे भी रख दिए जाएं तो कुछ समय बाद वे भी गले हुए मिलते हैं । अब इसका अंदाज़ा सहज ही लगाया जा सकता है कि ये शरीर के अंदर जाकर कितना भयानक प्रभाव छोडता होगा ।
इस मुद्दे पर गौर करने लायक एक और बात ये है कि ,शायद ही इस बात पर किसी ने कभी ध्यान दिया हो कि इन गुटखों का घटिया निर्माण और बहुत ही बेकार सामग्री के इस्तेमाल के कारण इसका मूल्य काफ़ी कम होता है । इसका दोहरा बुरा प्रभाव आम व्यक्ति पर पडता है । एक तरफ़ तो एक घटिया उत्पाद के सेवन से वो लगातार ही अपनी सेहत से खिलवाड करता जाता है , दूसरी तरफ़ चूंकि ये बेहद सस्ता होता है इसलिए धीरे धीरे खाने वाले की लत बढती जाती है । मोटे मोटे आंकडों के हिसाब से इसे खाने वाला एक व्यक्ति प्रति दिन कम से कम तीन गुटखे और ज्यादा से ज्यादा पंद्रह बीस तक भी खा जाते हैं । सबसे खौफ़नाक बात ये है कि स्कूलों के बाहर इसकी खासी खपत देखी गई है । मतलब स्पष्ट है , आज के बच्चे भी तेजी से इसकी गिरफ़्त में फ़ंसते जा रहे हैं ।हैरत और दुख की बात ये भी है कि सरकार को इससे शराब की तरह बहुत बडी आय भी नहीं हो रही है जो कि सरकार इस पर अंकुश नहीं लगा रही है । यदि जल्दी ही इस ज़हर को फ़ैलने से नहीं रोका गया तो एक दिन ऐसा आएगा जब ये ज़हर लाईलाज़ हो जाएगा ।